Cycle Ka Avishkar Kisne Kiya? और कब किया था पूरी जानकारी

हेल्लो दोस्तों आज के हमारा टॉपिक है Cycle Ka Avishkar Kisne Kiya? और कब किया था ये जानने से पहले कुछ पुरानी कुछ साईकल का इतिहास के बारे में जान लेते है आज के समय में एक से एक बढ़कर गाड़िया हमारे बिच मौजूद है जिसपर हम बरी मजे से सफर करते है कभी एक समय था कि हर किसी के पास साईकिल हुआ करती थी और किसी के पास नहीं भी थी

Cycle Ka Avishkar Kisne Kiya
Cycle Kisne Banaya

उस समय जिनके पास नहीं थी वह दूसरे से मांगकर अपना काम को अंजाम देते थे साधारण लोगो के लिए इससे बढ़िया यात्रा का साधन कोई और नहीं था आज के समय में इसका वजूद कही दिख नहीं रहा है अब सडको पर कार, बाइक, बस इत्यादि वाहने इतनी ज्यादा दिखाई देती है कि साईकल का कोई नाम भी लेता है और अब किसी को साईकल चलाकर कही जाने में अपना अपमान मानते है

भले के आज के समय में ये हमारे लिए ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं है लेकिन पहले का इतिहास बताता है की हमारे लिए कितनी खास थी तो देर किस बात की चलते है साईकल के सफर कि योर क्या आप जानते है कि Cycle Ka Avishkar Kisne Kiya? और कब किया था और साइकल कितने लोगो ने ने मिलकर बनाया और वह किस देश के थे ऐसे ही बहुत सारे बात है साईकिल के बारे में करेंगे इसलिए इस टॉपिक पर बने रहे और ध्यान से पढ़े।

Cycle Ka Avishkar Kisne Kiya? पूरी कहानी में

Cycle Ka Avishkar Kisne Kiya

  • साइकिल बनाने में कोई विज्ञानिको का योगदान है इसलिए किसी एक की किसका श्रेय देना आसान नहीं है इसके निर्माता के बारे में अगर किसी को नहीं पता हो लेकिन इससे जुड़ी कुछ अनोखी बाटे है जो आपको भी पढ़ना चाहिए माना जाता है कि पहिये बनने के शुरुआत 1418 में कि गयी थी पहली साइकल बनने वाले का नाम Giovanni Fontana जो इटली के इंजीनियर थे।
  • Giovanni Fontana को सबसे पहली साइकल का निर्माता माना जाता है यह साइकल दो पहिया कि नाह बल्कि चार पहिया वाली होती थी ऐसा इसलिए बनाया गया था क्योकि इसे चलने वाले को कोई तकलीफ नहीं हो Giovanni Fontana ने चार पहिया वाले ही जैसा कुछ बना दिया था लेकिन इसमें 400 सालो तक किसी ने इसमें कुछ और तकनीक नहीं हुआ नहीं ये ऐसा ही रहा Giovanni Fontana कि यह खोज कही दबी ही रह गई।

Cycle Ka Avishkar Kisne Kiya

  • 400 साल बाद 1813 में एक जर्मन के इंजनीर Karl Freiherr Van Drais ने साइकल बनाने की जिमवारी इन्होने लिया और Karl Freiherr Van Drais ने 4 पहिये वाली साइकल को दो पहिये वाली साइकल में बदल दिया और इनका यह खोज बहुत ही लोकप्रिय रहा इस साइकल को यूरोप में Hobby Horse कह के पुकारते थे।
  • साइकल का तो निर्माण कर दिया पर इस साइकल में बहुत से अभी कमिया थी सबसे अनोखी बात ये थी की साइकल को चलने के लिए पैरो से धकेलना पड़ता था ये काम बहुत ही थका देता था और इसके कारण कही दूर भी नहीं जा सकते थे इस मेहनत को ख़त्म करने के लिए पैडिल का खोज हुआ।

Cycle Ka Avishkar Kisne Kiya

  • पैडिल का खोज स्कॉटलैंड (Scotland) के एक लोहर द्वारा किया गया जिसका नाम Kirkpareick Macmillan था माना जाता है कि 1839 में Macmillan ने कुछ लोगो को साइकल चलते हुए देखा उसने ये कि साइकल को अपने पैरो से धका दे रहे है इस तरह से चलने पर सब थक जाएंगे इसलिए Macmillan ने साइकल को कुछ आसान तरीको से चलने के लिए ढूढ़ने लगे क्योकि वह लोहार थे और अपने हुनर का इस्तमाल करते हुए।
  • कुछ उपाय सोची और उन्होंने कुछ ही समय में पैडिल तैयार कर लिया और जैसे ही उन्हीने इसे साइकल में लगाया तो साइकल का चलने का तजुर्बा ही बदल गया अब साइकल को धकेलने कि जरुरत नहीं थी अब उसे आसानी से चलये जा सकते थे।
  • उनकी बनायीं गयी लकड़ी की हुआ करती थी लेकिन पहियों को मजबूत रखने के लिए लोहे का प्रयोग किया गया था इस साइकल को सब चला सके इसलिए स्टेरिंग भी लगाया गया था इस साइकल में बहुत सी चीजे लगा दी गयी थी इस लिए साइकल का वजन लगभग 27 किलो की थी समय के साथ इसमें बहुत से सुधर किये गए।

Cycle Ka Avishkar Kisne Kiya

  • 1870 में आयी साइकल पूरी तरह लोहे की फ्रेम वाली हो गयी थी इसके साथ ही रब्बर का तैयार का इस्तमाल भी शुरू हो गया था रब्बर के टायर के चलते साइकल और अच्छी हो गयी थी 1870 से 1880 तक इस प्रकार के साइकल को Penny Faething कहा जाता था उसको अमेरिका में बहुत लोकप्रियता मिली इसने बहुत से लोगो को अपना ध्यान आकर्षित किया क्योकि इसका अगला पहिया बहुत बड़ा और पिछला पहिया काफी छोटा था।
  • इसे चलने में थोड़ी दिक्कत तो होती थी लेकिन यही एक साधन था जो चलाया जा सकता था माना जाता था की यह साइकल सुरक्षित नहीं होती थी क्यों अगला पहिया बड़ा और पिछला पहिया छोटा होने के कारण साइकल संभाल में नहीं आती थी और इसमें दुघटना का ज्यादा खतरा था ये बात काफी दुःख प्रिय थी किसी को भी समझ में नहीं आता था कि साइकिल को कैसे सुरक्षित किया जाए।

Cycle Ka Avishkar Kisne Kiya

  • 1880 में John Kemp Starley द्वारा साइकल में बदलाव हुआ कहा जाता है कि बदलाव होने के बाद उस साइकल का नाम रोबॉट साइकल नाम दिया गया यह पहली बार था कि साइकल कि बदलाव सुरक्षा के लिए बनाया गया था इस साइकल में खास बात यह थी कि पहली साइकल कि तरह पैडिल आगे नहीं बल्कि पैडिल पीछे के तैयार से जुड़े होते थे।
  • इसके बाद साइकल की विकाश में काफी तेजी से हुई 1920 से छोटे बच्चो के लिए भी साइकल बनाया जाने लगा तथा 1960 आते-आते साइकल का इतना अच्छा प्रदर्सन रहा कि इनका प्रयोग रेसिंग में किया जाने लगा समय के साथ-साथ साइकलो में बहुत से बदलाव होने लगे और आज तक साइकलो का बदलाव जारी है।

Cycle Ka Avishkar Kisne Kiya

  • पहले कि साइकल पैडिल से चलने वाली आज के समय में उनमे गेयर कि सुभिदा आया आज के समय में कई प्रकार के धातु से मिलकर साइकल बन रहा है क्योकि अब जवाना डिजिटल हो रहा है जिसके कारण इसका असर साइकलो पर भी दिख रहा है आज के समय में तकनीक के द्वारा इलेक्टॉनिक साइकलें आने लगी है।
  • इन साइकलो में बैटरी का प्रयोग किया जाता है इन साइकलो का उपयोग आज के समय में काफी ज्यादा किया जा रहा है पहले की साइकल पैडल वाली हो या आज के जवानी के इलेक्ट्रॉनिक वाली साइकल बहुत अच्छी साधन रही और ये बात भी हम मानते है की समय से साथ इसका उपयोग थोड़ा कम जरूर हुआ है लेकिन बदलती तकनीक ने साइकल चलने का मजा और भी बढ़ा दिया है दोस्तों आप क्या कहते है साइकल के बारे में हमें कमेंट में जरूर बताये।

हमने क्या सीखा :-

दोस्तों आज के आर्टिकल में हमने सीखा कि Cycle Ka Avishkar Kisne Kiya? और कब किया था, साइकल कि खोज कैसे हुआ, साइकल कि पहले जवाने में कैसी होती थी इत्यादि साइकल से जुडी पूरी कहानी के आधार पर जानकारी दिया गया है

दोस्तों अगर आपको कोई समस्या है तो कमेंट करे हम आपको जवाब जोर देंगे।

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धन्यवाद्

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