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Ayodhya Ram Mandir History – अयोध्या का राम मंदिर का इतिहास

आज का हमारा आटिकल बहुत ही दिलचस्प होने वाला है क्योकि आज के पोस्ट में हम जानने वाले है Ayodhya Ram Mandir History यानि अयोध्या का पूरा इतिहास जैसे- अयोध्या और फ़ैजाबाद में क्या फर्क है और अयोध्या के मुख्य आकर्षण चीजों के बारे में इस आटिकल में जानने वाले है।

अयोध्या भारत के उत्तर प्रदेश राज्य का एक अति प्राचीन और धार्मिक नगर है ये पवित्र शरयु नदी के तट पर बसा हुआ हुआ है माना जाता है की इस नगर को मनु ने बसाया था और इसे अयोध्या नाम दिया जिसका अर्थ होता है अयुद्ध जिसका मतलब होता है की जहा कभी युद्ध नहीं हो।

इसे प्राचीन समय में कौशल नाम से भी जाना जाता था पुराने मान्यताओ के अनुसार अयोध्या में सूर्यवंशी और रघु वंशी राजाओ का राज हुआ करता था।

जिसमे आगे चलकर भगवान श्रीराम ने अवतार लिया था यहाँ पर सातवी सताब्दी में चीनी यात्री हिन्संग भी आया था उसके अनुसार यहाँ 20 बौद्ध मंदिर थे तथा 3000 भिक्षु रहा करते थे।

ये नगर सप्त पुरियों में से एक है ऐसे ही कुछ और भी बाते जानेंगे चलाए अपने आटिकल की ओर बढ़ते है और जानते है Ayodhya Ram Mandir History अयोध्या के कुछ इतिहास के बारे में जन लेते है।

Ayodhya Ram Mandir History In Hindi

तो चलिए जानते है अयोध्या का इतिहास के बारे में वेदों में अयोध्या को ईस्वर का नगरी बताया गया है और इसकी सम्प्यता की तुलना स्वर्ग से किया गया है अथौर वेद में अयोध्या का उल्लेख है “ “ ये पूरी तट पर 12 योजन लगभग 144 किलोमीटर लम्बाई और 3 योजन लगभग 36 किलोमीटर चौड़ाई में बसी थी कई वर्षो तक सूर्य वंशी राजाओ की राजधानी रहा यह मूल रूप से हिन्दू मंदिरों का शहर है।

यहाँ आज भी धर्म से जुड़े अवशेष देख सकते है जैन मान्यता के अनुसार यहाँ 24 तिर्थ्थान्करो में से 5 तीर्थकर का जन्म हुआ था इसके अलावा जैन और वैदिक दोनों मतों के अनुसार भगवान रामचन्द्र जी का जन्म इसी स्थान पर हुआ था।

यहाँ पर सभी तिर्थंकरो तथा भगवान रामचंद्र जी एक्चुआसू वंश थे इसका महत्व इसका प्राचीन इतिहास में निहित है क्योकि भारत के प्रसिद्ध प्रतिपी क्षत्रियो का नगर रहा रहा है।

अयोध्या में ही जन्मे श्रीराम को विष्णु जी के सातवे अवतार को में जाना जाता है पहले अयोध्या कौसल जनपत के राजधानी था प्राचीन उल्लेखो के अनुसार तब इसका क्षेत्रफल 96 वर्ग मिल था।

Ayodhya Or Faizabad – अयोध्या और फ़ैजाबाद

Ayodhya Ram Mandir History: चलिए जान लेते है अयोध्या और फैज़ाबाद के बारे में कोई अनसुनी बाते कभी-कभी बहुत से लोगो को इन दोनों शहरों में भ्रम होने लगता है आम तौर पर इन दोनों शहरों को एक ही शहर समझने लगते है।

अयोध्या भारत के प्राचीन शहरो में सुमार है और करोडो भारतीय के आराध्य भगवान श्रीराम के जन्मस्थली के रूप में विख्यात है फ़ैजाबाद भी एक शहर है जो अयोध्या से 10 किलोमीटर के दुरी पर स्थित है फ़ैजाबाद को अवध के सुवेदार के नुयुक्त किये गए एक ईरानी सादत आली ने 1722 ई: में बसाकर अवध के पहली राजधानी बनाया था।

जिसे बाद में नवाब Asaf-ud-Daula द्वारा 1775 में लखनऊ ले जाया गया और इसके बाद फ़ैजाबाद का पतन हो गया इस 50 साल के अवधी के नवाबो ने उस राजधानी में बहुत से खुबसूरत इमारतों का निर्माण करवाया लखनऊ की तरह फ़ैजाबाद भी हमें नवाब कालीन दौर की याद दिलाता है।

अवध के नवाबो के बारे में अगर इतिहास उठाकर पढ़ते है तो जानेंगे की अयोध्या के श्री हनुमान गाढ़ी मंदिर  का जीर्ण उधार और लखनऊ शहर के अलिजंग में स्थित एक हनुमान मंदिर  का निर्माण करवाया था।

फ़ैजाबाद शहर बसने के बाद भी अयोध्या अपने धार्मिक स्वरुप और धार्मिक पराकास्ठा के कारण आम हिन्दू जन्मानस के बीच आस्था के केंद्र के रूप में बिख्यात रहा।

इसे हम इस नजरिये से देख सकते है की सदाद अली ने भगवान श्रीराम के बाद अयोध्या को ही अवध की राजधानी बनाया लेकिन ईरानी होंने के कारण वर्तमान अयोध्या नगरी से लगभग 10 किलोमीटर दूर जाकर अपनी फ़ार्सी जुवान में उसे फैजाबाद के नाम से अस्थापित कर दिया।

जिसका अर्थ कुछ ऐसे विद्वान शहर के निकलते है जिसका अर्थ होता है की जहां के लोगो सब बराबर है और जहां कोई भेद-भाव न हो यह एक तरह से महा रचित गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित श्रीरामचरितमानस में वर्णित राम राज के अव्ध्रना से मेल खाता है।

कुछ समय के बाद जब हमारा देश अग्रेजो के अधीन आया तो उन्होंने फैजावाद शहर को जिले का दर्जा दिया और नाम नगरी अयोध्या को भी इस जिले के अंतर्गत कर दिया।

आगे चलकर योगी आदित्यनाथ के सरकार ने अयोध्या शहर को जिला घोषित कर दिया और फ़ैजाबाद शहर को उसका प्रसासनिक मुक्यालय बना दिया मई 2017 तक फ़ैजाबाद शहर की अलग नगर पालिका थी और अयोध्या शहर की अलग नगर पालिका जिसके बाद भाजपा सरकार ने इसमें कुछ बदलाव किया।

उसने एक नया अयोध्या नगर निगम नाम से गठित कर दिया फ़ैजाबाद एक बहुत ही कुबसुरत और एक इतिहासिक शहर है लखनऊ के बाद ये दूसरा शहर है।

जिसकी इमारते नवाब कालीन दौर को फिर से जीवंत कर देती है इस शहर को बहुत से साहित्यकारों,कवियों और स्वतंत्रा सेनानियों का जन्म भूमि और कर्म भूमि होने का गौरव प्राप्त है रामायण का पहली पर उर्दू में अनुवाद करने वाला महान उर्दू कवि और पेसे से वाकित पंडित वज्रानारायण चक्वस्त का जन्म स्थल और कर्म स्थल भी फैजावाद ही था।

अयोध्या में मुख्य आकर्षण चीजे क्या-क्या है

Ayodhya Ram Mandir History: प्राचीन नगर अयोध्या का अवसेश खण्डहर के रूप में रह गए थे जिसमे कही-कही कुछ अछे मंदिर  भी बच्चे हुए थे लेकिन 9 नवम्बर 2019 को सुप्रीम कोट के इतिहासिक फैसले के बाद अब यहाँ पर एक भब्य राम मंदिर  बनने जा रहा है।

ये नया मंदिर  बनने तक राम लल्ला मूर्ति को जन्म स्थान से स्थानत्रित कर एक स्थाई मंदिर  में प्रतिस्थपित कर दिया गया है वर्तमान अयोध्या के प्राचीन मंदिरो में सीता रसोई और हनुमान गढ़ी मुख्य है।

कुछ मंदिर  18 वी तथा 20 वी सताव्दी में बने थे जिसमे है कनक भवन अगेस्वर नाथ तथा दर्शन सिंह मंदिर  दर्शनीय है इसके अलावा यहाँ कुछ जैन मंदिर  भी है भगवान श्रीराम के अतरिक्त अयोध्या में श्रीहरी के अन्य 7 प्राकट्य हुए है।

जिन्हें सप्त हरी के नाम से जाना जाता है अलग-अलग समय देवताओ और मुनियों के तपस्या से प्राकट्य हुए इनके नाम भगवान गुप्त हरि, विष्णु हरि, चक्र हरि, पूण्य हरि, दर्शन हरि और धर्म हरि इत्यादी है।

शहर के पश्चमी हिस्से में स्थित राम कोट अयोध्या में पूजा का प्रमुख स्थान है भारत तथा बिदेश से आने वाले श्रधालुओ का 12 मास आना जाना लगा रहता है मार्च अप्रैल में मनाया जाने वाला रामनमी पर्व यहाँ बड़े उत्साह और धूम-धाम से बनाया जाता है।

हनुमानगाढ़ी मंदिर कहाँ पर है और उसकी क्या विशेषता है

अयोध्या को भगवान श्रीराम की नगरी कहा जाता है कहा जाता है की यहाँ हनुमान जी सदैव वास करते है इसी लिए अयोध्या जाकर भगवान राम के दर्शन से पहले भक्त हनुमान जी के दर्शन करते है।

यहाँ के सबसे प्रमुख हनुमान मंदिर हनुमानगढ़ी के नाम से मसहुर है यह मंदिर  राज द्वार के सामने उचे टीले पर स्थित है कहा जाता है की हनुमान जी यहाँ एक गुफा में रहते है और राम जन्म भूमि और राम कोट की रक्षा करते है।

मान्यता है की हनुमान जी को रहने के लिए यह स्थान दिया गया था भगवान श्रीराम ने यह अधिकार दिया था की जो भी भक्त मेरे दर्शनों के लिए अयोध्या आयेगा उसे पहले तुम्हारे दर्शन करने होंगे।

यहाँ आज भी छोटी दीपावली के दिन संकट मोचन (हनुमान जी) का जन्म दिन मनाया जाता है ये मंदिर  एक टीले पर स्थित जिसके कारण यहाँ तक पहुचने के लिए लगभग 76 सीढियों को चढ़ना पड़ता है।

इसके बाद पवन पुत्र हनुमान जी के 6 इंच के प्रतिमा का दर्शन होते है जो हमेशा फुल मालाओ से सुशोभित रहते है मुख्य मंदिर में बाल हनुमान के साथ अंजनी माता के भी प्रतिमा है श्रद्धालुओ मानना है की मंदिर में आने से उनकी सारी मनोकामनाये पूर्ण होती है।

इस मंदिर के निर्माण से पूर्व एक कथा प्रचलित है सुल्तान मंसूर अली खां अवध का नवाब था एक बार उसका एकलौता पुत्र गंभीर रूप से बीमार पड़ गया प्राण बचने के आसार बहुत कम थे रात्रि के समय उसकी नाड़ी उखड़ने लगी सुल्तान ने थक हारकर संकट मोचन हनुमान जी के चड़ने में माथा रख दिया इसके बाद सुल्तान के पुत्र की धडकन चलने लगी

अपने इकलौते पुत्र के प्राणों के रक्षा होने पर अवध के नवाब सुल्तान मंसूर अली खान ने बजरंग बलि के चरणों में माथा टेककर कोटि-कोटि प्रणाम किया उसके बाद नवाब ने न केवल हनुमान गढ़ी का जिर्नुधार किया बल्कि ताम्र पत्र पर लिखकर ये भी घोसणा की कभी भी इस मंदिर पर किसी राजा या शासक का कोई अधिकार नहीं रहेगा और न ही यहाँ के कोई चढ़ावे से कोई कर वसूल करेगा।

इसके बाद उसने 52 बीघा जमीन हनुमान गढ़ी और इमली वन के लिए भी उपलब्द कराई इस हनुमान के निर्माण के कोई स्पस्ट साक्षी नहीं मिलते है लेकिन कहते है की अयोध्या न जाने कितनी बार बसी और उजड़ी लेकिन फिर भी एक स्थान हमेशा अपने मूल स्वरूप में था वो था हनुमान टीला जो आज हनुमान गढ़ी के नाम से प्रसिद्ध है।

लंका से विजय के प्रतिक के रूप में ले जाए निसान भी इसी मंदिर में रखे गए है जो की खास मौके पर ही बाहर निकाले जाते है और जगह-जगह पर उनकी पूजा अर्चना की जाती है।

राघवजी का मंदिर के बारे में कुछ बाते

राघवजी का मदिर अयोध्या नगर के केंद्र में स्थित बहुत ही प्राचीन भगवान श्रीराम का स्थान है जिसको हम राघवजी का मंदिर कहते है मंदिर में स्थिर भगवान राघवजी अकेले ही विराजमान है एक एक मात्र मंदिर है जिसमे भगवान श्रीराम  के साथ माता सीता का मूर्ति नहीं है।

नागेश्वर नाथ मंदिर के बारे में कुछ बाते

कहा जाता है की नागेश्वर नाथ मंदिर को भगवान राम के पुत्र कुश ने बनवाया था कहा जाता है की जब कुश सरयू नदी में नहा रहे थे तब उनका बाजु बंद खो गया और वह बंजु बंद एक नाग कन्या को मिला जिसे कुश से प्रेम हो गया।

वो कन्या शिव भक्त थी कुश ने उसके लिए ये मंदिर बनवाया कहा जाता है की यही एक मात्र मंदिर है जो विक्रमादित्य के काल से पहले से मौजूद है 5 अगस्त 2020 को अयोध्या में बनने वाले भब्य और विशाल मंदिर का शिलान्यास किया गया।

हमने क्या पढ़ा –

अब तो आप जान गए होंगे कि Ayodhya Ram Mandir History यानि अयोध्या का पूरा इतिहास के बारें में काफी अच्छी तरह से बताया गया है ताकि आप अच्छी तरह से समझ सकें।

उम्मीद करता हूँ की आपको यह पोस्ट पसंद आया होगा अगर आपको इसके बारे में समझने में कोई दिक्कत हो या कोई सवाल है तो कमेंट बॉक्स में पूछ सकते है हम आपके प्रश्न का उत्तर जरूर देंगे।

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